नागपुर, 10 अगस्त 2026: नागपुर ने अंगदान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शहर के जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (ZTCC) के अनुसार, वर्ष 2013 से अब तक नागपुर में 200 मृत अंगदाताओं का आंकड़ा पार हो गया है। यह उपलब्धि उन परिवारों के साहस और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाती है, जिन्होंने अपने प्रियजन की मृत्यु के बाद उनके अंगदान का निर्णय लेकर दूसरे लोगों को नया जीवन देने में मदद की।
200वें मृत अंगदाता बने शिक्षक कोंडबा दत्तात्रय मडावी
हालिया मामले में यवतमाल जिले के घाटांजी निवासी 52 वर्षीय शिक्षक कोंडबा दत्तात्रय मडावी नागपुर क्षेत्र के 200वें मृत अंगदाता बने। उनके अंगदान से तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने में मदद मिली। यह वर्ष 2026 में नागपुर क्षेत्र का 15वां मृत अंगदान भी बताया गया है।
यह घटना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कठिन समय में लिया गया एक मानवीय फैसला कई परिवारों के जीवन में उम्मीद ला सकता है।
अंगदान से कई लोगों को मिलती है नई जिंदगी
मृत अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों तक किडनी, लिवर, हृदय और अन्य उपयोगी अंग पहुंचाए जा सकते हैं। नागपुर का ZTCC अंगों के आवंटन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार प्रतीक्षारत मरीजों तक अंगों का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
ZTCC के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 14 मई 2026 तक नागपुर में 320 किडनी, 147 लिवर, 21 साझा किए गए हृदय और 5 साझा किए गए फेफड़ों के प्रत्यारोपण दर्ज किए गए थे।
2026 में भी जारी है अंगदान का सिलसिला
इस साल की शुरुआत में भंडारा जिले के पवनी के 26 वर्षीय युवक नागपुर के 2026 के पहले मृत अंगदाता बने थे। उस समय ZTCC द्वारा समन्वित मृत अंगदानों की संख्या 186 तक पहुंची थी और उनके अंगदान से तीन गंभीर मरीजों को जीवनदान मिलने की उम्मीद बनी थी।
इसके बाद जुलाई में गड़चिरोली के 26 वर्षीय छात्र रोहित गुलाडे के परिवार ने उनके ब्रेन-स्टेम डेड घोषित होने के बाद दोनों किडनी दान करने की सहमति दी। दोनों किडनियां नागपुर के दो मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं। उस समय ZTCC के अनुसार यह 2026 का 13वां और 2013 के बाद क्षेत्र का 197वां मृत अंगदाता था।
AIIMS नागपुर में भी अंगदान को मिली नई दिशा
जून 2026 में AIIMS नागपुर में छह वर्षीय बच्ची आकांक्षा महादेव बंसोड़ के अंगदान का मामला भी सामने आया। ब्रेन-डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार की सहमति से उनकी दोनों किडनियां दान की गईं, जिससे एक बच्चे के लिए जीवन बचाने वाला प्रत्यारोपण संभव हुआ। PIB के अनुसार, यह AIIMS नागपुर का पहला इन-हाउस बाल मृत अंगदान था।
परिवारों का फैसला सबसे महत्वपूर्ण
अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और मानवीय निर्णय भी है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने के बाद अंगदान की सहमति देना बेहद कठिन हो सकता है। लेकिन ऐसे फैसले उन मरीजों और परिवारों के लिए उम्मीद बनते हैं जो लंबे समय से प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
नागपुर में 200 मृत अंगदाताओं का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि अंगदान को लेकर जागरूकता और सामाजिक स्वीकार्यता धीरे-धीरे बढ़ रही है।
नागपुर के लिए गर्व का पल
200 मृत अंगदाताओं का यह आंकड़ा केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है। यह नागपुर और विदर्भ के उन परिवारों को सम्मान देता है जिन्होंने व्यक्तिगत दुख के बीच मानवता को प्राथमिकता दी।
एक जीवन का अंत, दूसरे जीवन की नई शुरुआत बन सकता है।
अंगदान के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना और परिवार के सदस्यों से अपनी इच्छा पर पहले से बातचीत करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। ZTCC नागपुर अंगदान से संबंधित मार्गदर्शन और समन्वय उपलब्ध कराता है।
❤️ नागपुर की इस उपलब्धि को सलाम
200 मृत अंगदाता — सैकड़ों परिवारों की उम्मीद — और अनगिनत जिंदगियों को नई रोशनी।
नागपुर का यह मुकाम बताता है कि इंसान दुनिया से जाने के बाद भी किसी और की जिंदगी में उम्मीद छोड़ सकता है।
