नागपुर में अलग विदर्भ की मांग फिर तेज, क्रांति दिवस पर सड़कों पर उतरे समर्थक

नागपुर | 10 अगस्त 2026

अलग विदर्भ राज्य की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर नागपुर में जोर पकड़ती दिखाई दी। क्रांति दिवस (9 अगस्त) के अवसर पर रविवार को करीब 1,000 अलग विदर्भ समर्थक नागपुर की सड़कों पर उतरे और अलग राज्य की मांग को लेकर लंबा मार्च निकाला।

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📢 दीक्षाभूमि से संविधान चौक तक निकला मार्च

विदर्भ राज्य आंदोलन समिति (VRAS) की ओर से आयोजित ‘विदर्भ निर्माण जनसंकल्प लॉन्ग मार्च’ दोपहर करीब 1 बजे दीक्षाभूमि से शुरू हुआ और लगभग 2:30 बजे संविधान चौक पहुंचकर जनसभा में बदल गया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक मार्च में शामिल हुए और ‘जय विदर्भ’ तथा अलग विदर्भ राज्य के समर्थन में नारे लगाए।

आंदोलनकारियों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से अलग विदर्भ राज्य के गठन की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की। संगठन के मुताबिक मार्च में विदर्भ के 11 जिलों और 120 तहसीलों से लोग पहुंचे थे।

🗣️ ‘दिसंबर 2027 तक अलग विदर्भ’

इस आंदोलन में ‘Mission 2027’ पर खास जोर दिया गया। VRAS ने कहा कि उसका लक्ष्य दिसंबर 2027 से पहले अलग विदर्भ राज्य का गठन है। संगठन ने चेतावनी दी कि मांग पर लगातार अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

यह मांग अचानक सामने नहीं आई है। अलग विदर्भ को लेकर आंदोलन लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है। मई 2026 में VRAS ने अपने आंदोलन को तेज करने के लिए विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन और जनसंपर्क कार्यक्रमों का रोडमैप भी घोषित किया था, जिसमें 9 अगस्त का नागपुर लॉन्ग मार्च प्रमुख कार्यक्रम था।

🚦 रास्ता रोको के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिरासत में

मार्च के दौरान एक छोटे समूह ने रास्ता रोको करने का प्रयास किया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस के अनुसार इस घटना के बाद करीब पांच प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया

❓ अलग विदर्भ की मांग क्यों उठती रही है?

अलग विदर्भ के समर्थकों का तर्क है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका मानना है कि अलग राज्य बनने से स्थानीय स्तर पर प्रशासन और विकास की प्राथमिकताओं पर अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।

दूसरी ओर, अलग राज्य का विरोध करने वाले लोगों का मानना है कि विदर्भ का विकास महाराष्ट्र के भीतर रहते हुए भी बेहतर प्रशासन और निवेश के जरिए किया जा सकता है। इसलिए यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक, प्रशासनिक और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी व्यापक बहस भी है।

📜 विदर्भ आंदोलन का पुराना इतिहास

अलग विदर्भ की मांग नई नहीं है। राज्य पुनर्गठन के दौर में भी विदर्भ को अलग राज्य बनाने पर चर्चा हुई थी। 1955 की राज्य पुनर्गठन आयोग (Fazal Ali Commission) की रिपोर्ट ने मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र को अलग राज्य के रूप में गठित करने की सिफारिश की थी। बाद में 1960 में महाराष्ट्र राज्य के गठन के साथ विदर्भ महाराष्ट्र का हिस्सा बना।

इसके बाद भी समय-समय पर अलग विदर्भ की मांग राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के जरिए सामने आती रही है।

🔥 अब आगे क्या?

9 अगस्त की रैली के बाद VRAS ने संकेत दिया है कि Mission 2027 के तहत आंदोलन का अगला चरण और आक्रामक हो सकता है। संगठन पहले ही अलग-अलग जिलों में जनसंपर्क और विरोध कार्यक्रमों की योजना बना चुका है।

नागपुर में हुई यह रैली बताती है कि अलग विदर्भ का मुद्दा एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में आ गया है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में यह आंदोलन कितना व्यापक होता है और राज्य व केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आती है।


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